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mahabharat 12.36.31-32h: ‘बाएँ हाथ से लाया या परोसा हुआ भोजन, बासी चावल, मद्य मिला हुआ भोजन, बचा हुआ भोजन तथा परिवार के सदस्यों को न देकर अपने लिए बचाकर रखा हुआ भोजन, ये सभी अभक्ष्य हैं।॥31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  12.36.31-32h 
वामहस्ताहृतं चान्नं भक्तं पर्युषितं च यत्॥ ३१॥
सुरानुगतमुच्छिष्टमभोज्यं शेषितं च यत्।
 
 
अनुवाद
‘बाएँ हाथ से लाया या परोसा हुआ भोजन, बासी चावल, मद्य मिला हुआ भोजन, बचा हुआ भोजन तथा परिवार के सदस्यों को न देकर अपने लिए बचाकर रखा हुआ भोजन, ये सभी अभक्ष्य हैं।॥31 1/2॥
 
‘Food brought or served with the left hand, stale rice, alcohol mixed food, leftovers and food saved for oneself instead of giving it to family members are all inedible.॥ 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)