Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.36.30-31h: जिन्हें समाज या गांव ने दोषी घोषित कर दिया हो, जो नाच-गाकर जीविका चलाते हों, जो अपने छोटे भाई के विवाह के बाद भी अविवाहित रह गए हों, जो चारण या भाट का काम करते हों या जुआ खेलते हों, ऐसे लोगों का भोजन ग्रहण करने योग्य नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 12.36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  12.36.30-31h 
गणग्रामाभिशस्तानां रङ्गस्त्रीजीविनां तथा॥ ३०॥
परिवित्तीनां पुंसां च बन्दिद्यूतविदां तथा।
 
 
अनुवाद
जिन्हें समाज या गांव ने दोषी घोषित कर दिया हो, जो नाच-गाकर जीविका चलाते हों, जो अपने छोटे भाई के विवाह के बाद भी अविवाहित रह गए हों, जो चारण या भाट का काम करते हों या जुआ खेलते हों, ऐसे लोगों का भोजन ग्रहण करने योग्य नहीं है।
 
'Those who have been declared guilty by the society or the village, those who earn their livelihood by dancing, those who have remained unmarried even after the marriage of their younger brother, those who work as a bard (charan or bard) or are gamblers, the food of such people is not worth accepting. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)