श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.36.27 
राजान्नं तेज आदत्ते शूद्रान्नं ब्रह्मवर्चसम्।
आयु: सुवर्णकारान्नमवीरायाश्च योषित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राजा का भोजन तेज को नष्ट कर देता है, शूद्र का भोजन ब्राह्मणत्व को नष्ट कर देता है, सुनार का भोजन या पति और पुत्र से रहित युवती का भोजन जीवन को नष्ट कर देता है॥ 27॥
 
‘The food of a king takes away one's brilliance, the food of a shudra destroys one's brahminical power, the food of a goldsmith or a young woman bereft of a husband and son ruins one's life.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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