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mahabharat 12.36.26: यदि किसी की मृत्यु हो गई हो या उसे प्रसव पीड़ा हुई हो, तो उसके घर दस दिन तक भोजन नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार, यदि गाय दस दिन से कम आयु की हो, तो उसका दूध भी नहीं पीना चाहिए।॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.36.26 
प्रेतान्नं सूतिकान्नं च यच्च किंचिदनिर्दशम्।
अभोज्यं चाप्यपेयं च धेनोर्दुग्धमनिर्दशम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि किसी की मृत्यु हो गई हो या उसे प्रसव पीड़ा हुई हो, तो उसके घर दस दिन तक भोजन नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार, यदि गाय दस दिन से कम आयु की हो, तो उसका दूध भी नहीं पीना चाहिए।॥26॥
 
'If someone has died or has suffered a birth pollution, no food should be consumed at his place for ten days. Similarly, even the milk of a calving cow should not be consumed if it is less than ten days old.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)