श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 36: स्वायम्भुव मनुके कथनानुसार धर्मका स्वरूप, पापसे शुद्धिके लिये प्रायश्चित्त, अभक्ष्य वस्तुओंका वर्णन तथा दानके अधिकारी एवं अनधिकारीका विवेचन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.36.18 
क्षयं शोकं प्रकुर्वाणो न म्रियेत यदा नर:।
शस्त्रादिभिरुपाविष्टस्त्रिरात्रं तत्र निर्दिशेत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई मनुष्य अपने पुत्र की मृत्यु के शोक में मरणव्रत पर बैठे अथवा शस्त्र आदि से आत्महत्या करने का प्रयत्न करे; और यदि वह न मरे, तो भी उसे तीन रात्रि तक उपवास करने को कहा जाए, ताकि जो पाप उसने किया है, उसका प्रायश्चित हो सके ॥18॥
 
‘If a man grieving the death of his son sits on a fast unto death or tries to commit suicide with a weapon etc.; But even in the case that he does not die, he should be told to fast for three nights to atone for the blame for the blasphemous act that was attempted. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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