Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.359.4: सुन्दरी! क्या मेरे वियोग से तुम व्याकुल हो गयीं? क्या तुम्हारी स्त्रियोचित बुद्धि के कारण धर्म की मर्यादा नष्ट हो गयी या असंरक्षित रह गयी और उसी कारण तुम धर्म से विमुख हो गयीं या उससे दूर हो गयीं?॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.359: नागराजका घर लौटना, पत्नीके साथ उनकी धर्मविषयक बातचीत तथा पत्नीका उनसे ब्राह्मणको दर्शन देनेके लिये अनुरोध । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न खल्वस्यकृतार्थेन स्त्रीबुद्धॺा मार्दवीकृता।
मद्वियोगेन सुश्रोणि विमुक्ता धर्मसेतुना॥ ४॥
अनुवाद
सुन्दरी! क्या मेरे वियोग से तुम व्याकुल हो गयीं? क्या तुम्हारी स्त्रियोचित बुद्धि के कारण धर्म की मर्यादा नष्ट हो गयी या असंरक्षित रह गयी और उसी कारण तुम धर्म से विमुख हो गयीं या उससे दूर हो गयीं?॥4॥
‘Sundari! Did my separation make you restless? Due to your womanly intelligence, did the limits of Dharma fail or remain unprotected and because of that did you turn away from Dharma or move away from it?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥