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श्लोक  12.358.6 
अस्मानभिगतश्चासि वयं च त्वामुपस्थिता:।
कार्यं चातिथ्यमस्माभिर्वयं सर्वे कुटुम्बिन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आप हमारे घर अतिथि बनकर आए हैं और हम आपकी सेवा के लिए उपस्थित हैं। आपका आतिथ्य करना हमारा कर्तव्य है; क्योंकि हम सब गृहस्थ हैं।
 
‘You have come to our house as a guest and we are present to serve you. It is our duty to host you; because we are all householders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)