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mahabharat 12.358.3: उन्होंने देखा कि एक ब्राह्मण गोमती नदी के तट पर एकांत स्थान पर बिना कुछ खाए-पिए, व्रत और अनुशासन का पालन करते हुए मंत्र जप रहा है।   |   mahabharat अध्याय 12.358: नागराजके दर्शनके लिये ब्राह्मणकी तपस्या तथा नागराजके परिवारवालोंका भोजनके लिये ब्राह्मणसे आग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.358.3 
तेऽपश्यन् पुलिने तं वै विविक्ते नियतव्रतम्।
समासीनं निराहारं द्विजं जप्यपरायणम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने देखा कि एक ब्राह्मण गोमती नदी के तट पर एकांत स्थान पर बिना कुछ खाए-पिए, व्रत और अनुशासन का पालन करते हुए मंत्र जप रहा है।
 
He saw that a Brahmin is sitting in a secluded place on the bank of river Gomati, devoted to the observance of fast and discipline, without eating anything and is chanting mantras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)