Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.358.1: भीष्म कहते हैं - हे पुरुषश्रेष्ठ! तत्पश्चात वह ब्राह्मण गोमती नदी के तट पर रहकर निराहार रहकर तपस्या करने लगा। उसके कुछ न खाने से वहाँ रहने वाले सर्प अत्यन्त दुःखी हुए॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.358: नागराजके दर्शनके लिये ब्राह्मणकी तपस्या तथा नागराजके परिवारवालोंका भोजनके लिये ब्राह्मणसे आग्रह करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म कहते हैं - हे पुरुषश्रेष्ठ! तत्पश्चात वह ब्राह्मण गोमती नदी के तट पर रहकर निराहार रहकर तपस्या करने लगा। उसके कुछ न खाने से वहाँ रहने वाले सर्प अत्यन्त दुःखी हुए॥1॥
Bhishma says - O best of men! Thereafter, living on the banks of the Gomati river, that Brahmin started performing penance without eating anything. The serpents living there were very sad because he did not eat anything.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥