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mahabharat 12.357.9: मेरे पति आर्यपुत्र के प्रवास का यह कारण आपको ज्ञात हो। उनके दर्शन के अतिरिक्त और कौन-सा कार्य है? यह मुझे बताइए, जिससे वह पूर्ण हो जाए॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.357.9 
एतद्विदितमार्यस्य विवासकरणं तव।
भर्तुर्भवतु किं चान्यत् क्रियतां तद् वदस्व मे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मेरे पति आर्यपुत्र के प्रवास का यह कारण आपको ज्ञात हो। उनके दर्शन के अतिरिक्त और कौन-सा कार्य है? यह मुझे बताइए, जिससे वह पूर्ण हो जाए॥9॥
 
Let this reason for the migration of my husband-Aryaputra be known to you. What other work is there other than his darshan? Tell me this; so that it may be accomplished.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)