श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.357.5 
सा तस्मै विधिवत् पूजां चक्रे धर्मपरायणा।
स्वागतेनागतं कृत्वा किं करोमीति चाब्रवीत् ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उन पतिव्रता सती ने विधिपूर्वक ब्राह्मण का पूजन किया और उनका स्वागत करते हुए कहा - 'ब्राह्मणदेव! आज्ञा कीजिए, मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हूँ?'॥5॥
 
That pious Sati worshipped the Brahmin as per rituals and welcomed him by saying, 'Brahmindev! Please order, what service can I render to you?'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)