Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.357.3: वह ब्राह्मण अपने उद्देश्य को भली-भाँति समझकर नियमानुसार यात्रा करता हुआ सर्प के घर पहुँचा। घर के द्वार पर पहुँचकर उसने 'भो:' शब्द से विभूषित वाणी कहकर पुकारा - 'क्या कोई है? मैं यहाँ द्वार पर आया हूँ।'॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह ब्राह्मण अपने उद्देश्य को भली-भाँति समझकर नियमानुसार यात्रा करता हुआ सर्प के घर पहुँचा। घर के द्वार पर पहुँचकर उसने 'भो:' शब्द से विभूषित वाणी कहकर पुकारा - 'क्या कोई है? मैं यहाँ द्वार पर आया हूँ।'॥3॥
The Brahmin, who understood his purpose well, went on a journey according to the rules and reached the house of the serpent. Reaching the door of the house, he called out uttering words adorned with the word 'Bho:' - 'Is there anyone? I have come here at the door.'॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥