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mahabharat 12.357.2: ब्राह्मण ने ऋषि से अपने अतिथि द्वारा बताए गए साँप के बारे में पूछा। ऋषि ने जो कुछ बताया, उसे अक्षरशः सुनकर ब्राह्मण आगे बढ़ा।   |   mahabharat अध्याय 12.357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.357.2 
तं स तेन यथोद्दिष्टं नागं विप्रेण ब्राह्मण:।
पर्यपृच्छद् यथान्यायं श्रुत्वैव च जगाम स:॥ २॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने ऋषि से अपने अतिथि द्वारा बताए गए साँप के बारे में पूछा। ऋषि ने जो कुछ बताया, उसे अक्षरशः सुनकर ब्राह्मण आगे बढ़ा।
 
The Brahmin asked the sage about the whereabouts of the snake mentioned by his guest. After listening to whatever the sage told him verbatim, the Brahmin proceeded further.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)