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mahabharat 12.357.13: तत्पश्चात वह श्रेष्ठ ब्राह्मण सर्पपत्नी को बार-बार सावधान करके (सांपों के राजा को भेजने के लिए) गोमती नदी के तट पर गया। 13॥   |   mahabharat अध्याय 12.357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.357.13 
तत: स विप्रस्तां नागीं समाधाय पुन: पुन:।
तदेव पुलिनं नद्या: प्रययौ ब्राह्मणर्षभ:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात वह श्रेष्ठ ब्राह्मण सर्पपत्नी को बार-बार सावधान करके (सांपों के राजा को भेजने के लिए) गोमती नदी के तट पर गया। 13॥
 
After that, that best Brahmin went to the banks of river Gomti after repeatedly warning the snake wife (to send the king of snakes). 13॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने सप्तपञ्चाशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)