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mahabharat 12.357.10: ब्राह्मण ने कहा, "हे सती-साध्वी देवी! मैं उनके दर्शन के निश्चय से यहाँ आया हूँ; अतः मैं उनके आगमन की प्रतीक्षा में इस महान वन में रहूँगा।"   |   mahabharat अध्याय 12.357: नागपत्नीके द्वारा ब्राह्मणका सत्कार और वार्तालापके बाद ब्राह्मणके द्वारा नागराजके आगमनकी प्रतीक्षा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.357.10 
ब्राह्मण उवाच
अनेन निश्चयेनाहं साध्वि सम्प्राप्तवानिह।
प्रतीक्षन्नागमं देवि वत्स्याम्यस्मिन् महावने॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा, "हे सती-साध्वी देवी! मैं उनके दर्शन के निश्चय से यहाँ आया हूँ; अतः मैं उनके आगमन की प्रतीक्षा में इस महान वन में रहूँगा।"
 
The Brahmin said, "O Sati-Sadhvi Devi! I have come here with the determination to see her; therefore, I will stay in this great forest awaiting her arrival."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)