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mahabharat 12.356.8: भीष्म कहते हैं - हे शत्रुवीर! तत्पश्चात अतिथि ने उस ब्राह्मण का आतिथ्य स्वीकार किया और पूरी रात उसके साथ वहीं रहा।   |   mahabharat अध्याय 12.356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.356.8 
भीष्म उवाच
ततस्तेन कृतातिथ्य: सोऽतिथि: शत्रुसूदन।
उवास किल तां रात्रिं सह तेन द्विजेन वै॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे शत्रुवीर! तत्पश्चात अतिथि ने उस ब्राह्मण का आतिथ्य स्वीकार किया और पूरी रात उसके साथ वहीं रहा।
 
Bhishma says - O enemy warrior! Thereafter the guest accepted the hospitality of that Brahmin and stayed there with him the whole night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)