Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.356.3-4: भोजन के समय अतिथि को मनचाहा भोजन मिलने पर जो आनन्द होता है, समय पर इच्छित वस्तु मिल जाने पर अपने मन को जो आनन्द होता है, पुत्र प्राप्ति पर वृद्ध पुरुष को जो आनन्द होता है, तथा मन में जिस प्रिय मित्र का चिन्तन कर रहा है, उसे देखकर मित्र को जो आनन्द होता है, आज आपने जो कुछ कहा है, उससे मुझे उतना ही आनन्द हो रहा है ॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 12.356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भोजन के समय अतिथि को मनचाहा भोजन मिलने पर जो आनन्द होता है, समय पर इच्छित वस्तु मिल जाने पर अपने मन को जो आनन्द होता है, पुत्र प्राप्ति पर वृद्ध पुरुष को जो आनन्द होता है, तथा मन में जिस प्रिय मित्र का चिन्तन कर रहा है, उसे देखकर मित्र को जो आनन्द होता है, आज आपने जो कुछ कहा है, उससे मुझे उतना ही आनन्द हो रहा है ॥3-4॥
The joy a guest gets on getting the food he wants at mealtime, the joy one's own mind gets on getting the desired thing on time, the joy an old man gets on getting a son, and the joy a friend gets on seeing the loving friend of whom the mind is thinking, today whatever you have said is giving me that much joy. ॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥