Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.356.2: मैं आपकी बात सुनकर उतना ही प्रसन्न हूँ, जितना वह व्यक्ति जो चलते-चलते थके हुए पथिक को शय्या, खड़े-खड़े दुखते हुए पैरों वाले को बैठने के लिए आसन, प्यासे को जल और भूखे को भोजन मिलने से संतुष्ट होता है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.356.2 
अध्वक्लान्तस्य शयनं स्थानक्लान्तस्य चासनम्।
तृषितस्य च पानीयं क्षुधार्तस्य च भोजनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
मैं आपकी बात सुनकर उतना ही प्रसन्न हूँ, जितना वह व्यक्ति जो चलते-चलते थके हुए पथिक को शय्या, खड़े-खड़े दुखते हुए पैरों वाले को बैठने के लिए आसन, प्यासे को जल और भूखे को भोजन मिलने से संतुष्ट होता है॥ 2॥
 
I am as happy to hear what you have to say as the one who is satisfied by getting a bed for a traveler who is tired of walking, a seat to sit on whose legs are aching from standing, water for a thirsty person and food for a hungry person.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)