Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.356.11: तत्पश्चात् वह धर्मात्मा ब्राह्मण अपने अभीष्ट कार्य को पूर्ण करने का निश्चय करके, अपने बन्धु-बान्धवों से अनुमति लेकर, अतिथि के कहे अनुसार सर्पराज के घर की ओर चल पड़ा। उसने अपने शुभ कार्य को पूर्ण करने का मन बना लिया था। ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् वह धर्मात्मा ब्राह्मण अपने अभीष्ट कार्य को पूर्ण करने का निश्चय करके, अपने बन्धु-बान्धवों से अनुमति लेकर, अतिथि के कहे अनुसार सर्पराज के घर की ओर चल पड़ा। उसने अपने शुभ कार्य को पूर्ण करने का मन बना लिया था। ॥11॥
Thereafter, that pious Brahmin, having resolved to fulfil his desired task, took permission from his relatives and proceeded towards the house of the King of Snakes as per the instructions of the guest. He had made up his mind to accomplish his auspicious task. ॥11॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने षट्पञ्चाशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥