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mahabharat 12.356.10: फिर दिन निकलने पर उस अतिथि को उस ब्राह्मण ने, जो उसका कार्य पूरा करना चाहता था, यथाशक्ति सत्कार देकर विदा किया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 356: अतिथिके वचनोंसे संतुष्ट होकर ब्राह्मणका उसके कथनानुसार नागराजके घरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.356.10 
तत: प्रभातसमये सोऽतिथिस्तेन पूजित:।
ब्राह्मणेन यथाशक्त्या स्वकार्यमभिकाङ्क्षता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
फिर दिन निकलने पर उस अतिथि को उस ब्राह्मण ने, जो उसका कार्य पूरा करना चाहता था, यथाशक्ति सत्कार देकर विदा किया॥10॥
 
Then at daybreak the guest, being honoured to the best of his abilities by the Brahmin who desired to accomplish his task, left.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)