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mahabharat 12.355.9: उनका स्वभाव जल के समान है। वे सदैव स्वाध्याय में लगे रहते हैं। वे तप, संयम, उत्तम आचरण और विचारों से युक्त हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.355.9 
प्रकृत्या नित्यसलिलो नित्यमध्ययने रत:।
तपोदमाभ्यां संयुक्तो वृत्तेनानवरेण च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उनका स्वभाव जल के समान है। वे सदैव स्वाध्याय में लगे रहते हैं। वे तप, संयम, उत्तम आचरण और विचारों से युक्त हैं॥9॥
 
His nature is like water. He is always engaged in self-study. He is endowed with austerity, self-control and good conduct and thoughts.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)