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mahabharat 12.355.8: वह नाग अत्यंत बुद्धिमान और शास्त्रों का ज्ञाता है। वह सभी को अतिथि के समान मानता है। वह सभी अद्वितीय और इच्छित गुणों से संपन्न है।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.355.8 
स हि सर्वातिथिर्नागो बुद्धिशास्त्रविशारद:।
गुणैरनुपमैर्युक्त: समस्तैराभिकामिकै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह नाग अत्यंत बुद्धिमान और शास्त्रों का ज्ञाता है। वह सभी को अतिथि के समान मानता है। वह सभी अद्वितीय और इच्छित गुणों से संपन्न है।॥8॥
 
That Naag is very intelligent and knowledgeable in the scriptures. He treats everyone as a guest. He is blessed with all the unique and desirable virtues. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)