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mahabharat 12.355.4: वहाँ एक महान धर्मात्मा सर्प निवास करता है। उस महान सर्प का नाम पद्मनाभ है; किन्तु वह पद्म नाम से ही प्रसिद्ध है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.355.4 
कृताधिवासो धर्मात्मा तत्र चक्षु:श्रवा महान्।
पद्मनाभो महानाग: पद्म इत्येव विश्रुत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ एक महान धर्मात्मा सर्प निवास करता है। उस महान सर्प का नाम पद्मनाभ है; किन्तु वह पद्म नाम से ही प्रसिद्ध है। 4॥
 
A great righteous snake resides there. The name of that great snake is Padmanabha; But she is famous only by the name Padma. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)