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mahabharat 12.355.1: अतिथि ने कहा, "हे ब्राह्मण! मैं तुम्हें अपने गुरु द्वारा बताए अनुसार इस विषय का सार धीरे-धीरे समझाऊंगा। कृपया मेरी बात सुनो।"   |   mahabharat अध्याय 12.355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 355: अतिथिद्वारा नागराज पद्मनाभके सदाचार और सद्‍गुणोंका वर्णन तथा ब्राह्मणको उसके पास जानेके लिये प्रेरणा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.355.1 
अतिथिरुवाच
उपदेशं तु ते विप्र करिष्येऽहं यथाक्रमम्।
गुरुणा मे यथाख्यातमर्थतत्त्वं तु मे शृणु॥ १॥
 
 
अनुवाद
अतिथि ने कहा, "हे ब्राह्मण! मैं तुम्हें अपने गुरु द्वारा बताए अनुसार इस विषय का सार धीरे-धीरे समझाऊंगा। कृपया मेरी बात सुनो।"
 
The guest said, "O Brahmin! I will gradually teach you the essence of this matter as told by my Guru. Please listen to what I say."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)