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mahabharat 12.354.6-7: जब मैं सुनता हूँ कि सांसारिक भोगों के संपर्क में आए हुए सात्विक पुरुष भी नाना प्रकार की यातनाएँ भोगते हैं और जब देखता हूँ कि सब लोगों पर यमराज की ध्वजाएँ लहरा रही हैं, तब भोग के समय भोगों को प्राप्त होने पर भी मुझे उन्हें भोगने की इच्छा नहीं होती। जब मैं संन्यासियों को भी दूसरों के द्वार पर अन्न और वस्त्र माँगते देखता हूँ, तब उस त्याग-धर्म को करने में भी मेरा मन नहीं लगता; इसलिए हे अतिथि! अब आप अपनी बुद्धि के बल से मुझे धर्म के द्वारा धर्म का पालन कराएँ॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 12.354: अतिथिद्वारा स्वर्गके विभिन्न मार्गोंका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 354: अतिथिद्वारा स्वर्गके विभिन्न मार्गोंका कथन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  12.354.6-7 
संयुज्यमानानि निशम्य लोके
निर्यात्यमानानि च सात्त्विकानि।
दृष्ट्वा तु धर्मध्वजकेतुमालां
प्रकीर्यमाणामुपरि प्रजानाम्॥ ६॥
न मे मनो रज्यति भोगकाले
दृष्ट्वा यतीन् प्रार्थयत: परत्र।
तेनातिथे बुद्धिबलाश्रयेण
धर्मेण धर्मे विनियुङ्क्ष्व मां त्वम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब मैं सुनता हूँ कि सांसारिक भोगों के संपर्क में आए हुए सात्विक पुरुष भी नाना प्रकार की यातनाएँ भोगते हैं और जब देखता हूँ कि सब लोगों पर यमराज की ध्वजाएँ लहरा रही हैं, तब भोग के समय भोगों को प्राप्त होने पर भी मुझे उन्हें भोगने की इच्छा नहीं होती। जब मैं संन्यासियों को भी दूसरों के द्वार पर अन्न और वस्त्र माँगते देखता हूँ, तब उस त्याग-धर्म को करने में भी मेरा मन नहीं लगता; इसलिए हे अतिथि! अब आप अपनी बुद्धि के बल से मुझे धर्म के द्वारा धर्म का पालन कराएँ॥6-7॥
 
When I hear that even the Sattvik persons who have come in contact with worldly pleasures suffer various kinds of tortures and when I see that the flags of Yamaraja are fluttering over all the people, then even though I get the pleasures at the time of enjoyment, I do not have any inclination to enjoy them. When I see even the sanyasis begging for food and clothes at the doors of others, then my mind does not feel like doing that renunciation-dharma either; therefore, O Guest, now with the power of your own intelligence, make me follow dharma through dharma.॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)