Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.354.4: अब तक मेरा सारा जीवन पुत्र से फल पाने की इच्छा में व्यतीत हुआ है। अब मैं ऐसा धर्ममय धन इकट्ठा करना चाहता हूँ जो परलोक की यात्रा के लिए उपयोगी हो।॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.354: अतिथिद्वारा स्वर्गके विभिन्न मार्गोंका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यावदेतदतीतं मे वय: पुत्रफलाश्रितम्।
तावदिच्छामि पाथेयमादातुं पारलौकिकम्॥ ४॥
अनुवाद
अब तक मेरा सारा जीवन पुत्र से फल पाने की इच्छा में व्यतीत हुआ है। अब मैं ऐसा धर्ममय धन इकट्ठा करना चाहता हूँ जो परलोक की यात्रा के लिए उपयोगी हो।॥4॥
Till now my whole life has been spent in the desire of getting fruits from my son. Now I want to collect such righteous wealth that can be used for the journey to the next world.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥