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mahabharat 12.354.11: कोई राजधर्म की खोज में है, कोई आत्मज्ञान की, कोई गुरुसेवा की और कोई मौनव्रत का आश्रय ले रहा है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.354: अतिथिद्वारा स्वर्गके विभिन्न मार्गोंका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 354: अतिथिद्वारा स्वर्गके विभिन्न मार्गोंका कथन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.354.11 
राजधर्माश्रयं केचित् केचिदात्मफलाश्रयम्।
गुरुधर्माश्रयं केचित्केचिद् वाक्संयमाश्रयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कोई राजधर्म की खोज में है, कोई आत्मज्ञान की, कोई गुरुसेवा की और कोई मौनव्रत का आश्रय ले रहा है ॥11॥
 
Some are seeking Rajdharma, some self-knowledge, some service to their Guru and some are taking refuge in the vow of silence. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)