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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 353: महापद्मपुरमें एक श्रेष्ठ ब्राह्मणके सदाचारका वर्णन और उसके घरपर अतिथिका आगमन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.353.9 
स तस्मै सत्क्रियां चक्रे क्रियायुक्तेन हेतुना।
विश्रान्तं सुसमासीनमिदं वचनमब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने अतिथि का आदरपूर्वक (शास्त्रों में वर्णित विधि से) स्वागत किया और जब अतिथि सुखपूर्वक बैठकर विश्राम करने लगा, तब उसने उससे इस प्रकार कहा।
 
The Brahmin welcomed the guest with due respect and ceremony (method prescribed in scriptures) and when the guest sat down comfortably and started resting, then he spoke to him as follows.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि उञ्छवृत्त्युपाख्याने त्रिपञ्चाशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें उञ्छवृत्तिका उपाख्यानविषयक तीन सौ तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)