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mahabharat 12.353.5: राजा! जब उसने देखा कि मेरे बहुत से पुत्र हैं, तब वह सांसारिक कार्यों से विरक्त होकर महान कार्यों में लग गया और कुलधर्म का आश्रय लेकर धर्माचरण में तत्पर रहने लगा॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.353: महापद्मपुरमें एक श्रेष्ठ ब्राह्मणके सदाचारका वर्णन और उसके घरपर अतिथिका आगमन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 353: महापद्मपुरमें एक श्रेष्ठ ब्राह्मणके सदाचारका वर्णन और उसके घरपर अतिथिका आगमन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.353.5 
स पुत्रान् बहुलान् दृष्ट्वा विपुले कर्मणि स्थित:।
कुलधर्माश्रितो राजन् धर्मचर्यास्थितोऽभवत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा! जब उसने देखा कि मेरे बहुत से पुत्र हैं, तब वह सांसारिक कार्यों से विरक्त होकर महान कार्यों में लग गया और कुलधर्म का आश्रय लेकर धर्माचरण में तत्पर रहने लगा॥5॥
 
King! When he saw that he had many sons, he became detached from worldly affairs and got involved in great deeds and taking shelter of his family's Dharma, he remained devoted to religious practices. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)