Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.352.3: हे भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य स्वर्ग या मोक्ष के किसी भी साधन के लिए प्रयत्न करता है और उसमें निश्चित सफलता प्राप्त कर लेता है, वह उसी साधन या धर्म को श्रेष्ठ मानता है, दूसरे को नहीं।॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.352: नारदके द्वारा इन्द्रको उञ्छवृत्तिवाले ब्राह्मणकी कथा सुनानेका उपक्रम । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्मिन् यस्मिंश्च विषये यो यो याति विनिश्चयम्।
स तमेवाभिजानाति नान्यं भरतसत्तम॥ ३॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य स्वर्ग या मोक्ष के किसी भी साधन के लिए प्रयत्न करता है और उसमें निश्चित सफलता प्राप्त कर लेता है, वह उसी साधन या धर्म को श्रेष्ठ मानता है, दूसरे को नहीं।॥3॥
O best of the Bharatas! Whichever man strives for any object of heaven or salvation and achieves sure success in it, he considers that means or Dharma to be the best and not the other. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥