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mahabharat 12.352.1: युधिष्ठिर बोले - पितामह! मैंने आपके द्वारा बताए गए कल्याण और मोक्ष संबंधी धर्मों को सुना। अब आप आश्रमधर्म का पालन करने वाले मनुष्यों के लिए जो भी उत्तम धर्म हो, उसका उपदेश करें। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.352: नारदके द्वारा इन्द्रको उञ्छवृत्तिवाले ब्राह्मणकी कथा सुनानेका उपक्रम   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 352: नारदके द्वारा इन्द्रको उञ्छवृत्तिवाले ब्राह्मणकी कथा सुनानेका उपक्रम  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.352.1 
युधिष्ठिर उवाच
धर्मा: पितामहेनोक्ता मोक्षधर्माश्रिता: शुभा:।
धर्ममाश्रमिणां श्रेष्ठं वक्तुमर्हति मे भवान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - पितामह! मैंने आपके द्वारा बताए गए कल्याण और मोक्ष संबंधी धर्मों को सुना। अब आप आश्रमधर्म का पालन करने वाले मनुष्यों के लिए जो भी उत्तम धर्म हो, उसका उपदेश करें। 1॥
 
Yudhishthir said – Grandfather! I listened to the religions related to welfare and salvation told by you. Now you should preach whatever is the best religion for the people who follow the Ashrama Dharmas. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)