श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.351.9 
तस्यैकत्वं महत्त्वं च स चैक: पुरुष: स्मृत:।
महापुरुषशब्दं स बिभर्त्येक: सनातन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उनमें एकता और महानता है, इसलिए उन्हें ही एकमात्र पुरुष माना जाता है। वे एक ही सनातन श्रीहरि महापुरुष कहलाते हैं॥9॥
 
There is unity and greatness in Him; therefore He alone is considered to be the only Purush (man). Only the one eternal Shri Hari bears the name of Mahapurush.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)