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mahabharat 12.351.6: वे योगात्मा श्रीहरि क्षेत्रज्ञ शुभ-अशुभ कर्मों के रूप में शरीरों और उनके कारणों को जानते हैं, इसलिए वे क्षेत्रज्ञ कहलाते हैं ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.351.6 
क्षेत्राणि हि शरीराणि बीजं चापि शुभाशुभम्।
तानि वेत्ति स योगात्मा तत: क्षेत्रज्ञ उच्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वे योगात्मा श्रीहरि क्षेत्रज्ञ शुभ-अशुभ कर्मों के रूप में शरीरों और उनके कारणों को जानते हैं, इसलिए वे क्षेत्रज्ञ कहलाते हैं ॥6॥
 
That Yogatma Shri Hari Kshetragya knows the bodies and their causes in the form of good and bad deeds, hence they are called Kshetragya. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)