श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.351.4 
ममान्तरात्मा तव च ये चान्ये देहिसंज्ञिता:।
सर्वेषां साक्षिभूतोऽसौ न ग्राह्य: केनचित् क्वचित् ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे मेरे, तुम्हारे तथा समस्त देहधारी जीवों के अन्तर्यामी हैं। वे सबके साक्षी भगवान श्रीहरि किसी के द्वारा पकड़े नहीं जा सकते ॥4॥
 
He is the inner soul of me, you and all other living beings with embodied names. The Supreme Personality of Godhead Shri Hari, the witness of all, cannot be caught by anyone. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)