एतत् ते कथितं पुत्र यथावदनुपृच्छत:।
सांख्यज्ञाने तथा योगे यथावदनुवर्णितम्॥ २३॥
अनुवाद
बेटा! तुम्हारे प्रश्न के अनुसार मैंने तुम्हें ये सब बातें यथार्थ रूप में बता दी हैं। सांख्य और योग में इस विषय का यथार्थ रूप में वर्णन किया गया है।
Son! As per your question I have told you all these things in their true form. This topic has been described in Sankhya and Yoga in its true form.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि नारायणीयसमाप्तौ एकपञ्चाशदधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३५१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें नारायणकी महिमाका उपसंहारविषयक तीन सौ इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)