श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.351.2 
न स शक्यस्त्वया द्रष्टुं मयान्यैर्वापि सत्तम।
सगुणो निर्गुणो विश्वो ज्ञानदृश्यो ह्यसौ स्मृत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
साधुशिरोमणि! आप, मैं या अन्य लोग भी इन चर्मचक्षुओं से उस सगुण-निर्गुण विश्वात्मा पुरुष को नहीं देख सकते। वे केवल ज्ञान से ही देखने योग्य माने जाते हैं। 2॥
 
Sadhushiromane! You, I or even other people cannot see that Sagun-Nirgun Vishwatma Purush through these skin eyes. They are considered worth seeing only through knowledge. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)