श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.351.19 
यद् वै सूते धातुराद्यं विधानं
तद् वै विप्रा: प्रवदन्तेऽनिरुद्धम्।
यद् वै लोके वैदिकं कर्म साधु
आशीर्युक्तं तद्धि तस्यैव भाव्यम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वे ही मुझ प्रजापति के आदि नियमों को रचने वाले हैं। विद्वान ब्राह्मण उन्हें अनिरुद्ध कहते हैं। संसार में जो वैदिक शुभ कर्म निष्काम भाव से किए जाते हैं, वे उन अनिरुद्धात्मा पुरुष के सुख के लिए ही हैं - ऐसा विचार करना चाहिए। 19॥
 
He is the one who creates the original laws of me, the Creator. Learned Brahmins call him Aniruddha. The Vedic good deeds which are done in the world with a sense of purpose, are only for the happiness of that Aniruddhaatma Purusha – this should be thought about. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)