श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.351.18 
द्रष्टा द्रष्टव्यं श्राविता श्रावणीयं
ज्ञाता ज्ञेयं सगुणं निर्गुणं च।
यद् वै प्रोक्तं तात सम्यक् प्रधानं
नित्यं चैतच्छाश्वतं चाव्ययं च॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वही द्रष्टा और दृश्य है। वही कहनेवाला और कहनेयोग्य है। वही ज्ञाता और ज्ञेय है, वही गुणसहित और निर्गुण है। हे प्रिय! जिसे मूल तत्व कहा गया है, वही पुरुष है। वही सनातन और अविनाशी तत्व है॥18॥
 
He is the seer and the seen. He is the teller and the thing to be told. He is the knower and the known and He is with qualities and without qualities. O dear! What has been called the true primary element is also this Purusha. He is the eternal and indestructible element.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)