श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.351.16 
स सप्तदशकेनापि राशिना युज्यते च स:।
एवं बहुविध: प्रोक्त: पुरुषस्ते यथाक्रमम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उसकी पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच भूत, मन और बुद्धि इन सत्रह तत्त्वों से युक्त सूक्ष्म शरीर से संयुक्त है। कर्मभेद से देवता, पक्षपात आदि का भाव प्राप्त होने के कारण वही अनेकरूप कहा गया है। इस प्रकार तुम्हें क्रमशः मनुष्य की एकता और अनेकता बताई गई थी। 16॥
 
Its five sense organs, five action senses, five ghosts, mind and intellect are combined with the subtle body consisting of these seventeen elements. The same has been said to be multi-fold because of getting the feelings of deity, bias etc. due to Karmabheda. In this way you were told the unity and diversity of man respectively. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)