vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन
»
श्लोक 14
श्लोक
12.351.14
तत्र य: परमात्मा हि स नित्यं निर्गुण: स्मृत:।
स हि नारायणो ज्ञेय: सर्वात्मा पुरुषो हि स:॥ १४॥
अनुवाद
इनमें स्थित परमेश्वर सदा निर्गुण माना गया है। उसे नारायण नाम से जानना चाहिए। वह परमात्मा है। 14॥
The God present in these is always considered to be without any qualities. He should be known by the name Narayan. He is the Supreme Soul. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×