श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.351.13 
एवं हि परमात्मानं केचिदिच्छन्ति पण्डिता:।
एकात्मानं तथाऽऽत्मानमपरे ज्ञानचिन्तका:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कुछ विद्वान् लोग अपने से भिन्न ईश्वर को पाना चाहते हैं। कुछ लोग अपने से भिन्न ईश्वर को - एकात्मा को - पाना चाहते हैं और अन्य विचारक केवल आत्मा को ही जानना या पाना चाहते हैं।॥13॥
 
In this way some scholars want to find God (different from themselves). Some want to find the God who is different from themselves – the Ekaatma (soul) and other thinkers want to know or find only the Atma (soul).॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)