Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.351.11: शरीर, इन्द्रिय आदि समस्त पुण्य पदार्थों में आसक्ति त्यागकर, शुभ-अशुभ कर्मों का त्याग करके तथा सत्य-असत्य दोनों का त्याग करके ही साधक पुण्यात्मा बन सकता है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.351.11 
हित्वा गुणमयं सर्वं कर्म हित्वा शुभाशुभम्।
उभे सत्यानृते त्यक्त्वा एवं भवति निर्गुण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
शरीर, इन्द्रिय आदि समस्त पुण्य पदार्थों में आसक्ति त्यागकर, शुभ-अशुभ कर्मों का त्याग करके तथा सत्य-असत्य दोनों का त्याग करके ही साधक पुण्यात्मा बन सकता है ॥11॥
 
A seeker can become virtuous only by giving up attachment to all the virtuous things like body, senses etc., renouncing good and bad deeds and renouncing both truth and falsehood. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)