श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 351: ब्रह्मा और रुद्रके संवादमें नारायणकी महिमाका विशेषरूपसे वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.351.1 
ब्रह्मोवाच
शृणु पुत्र यथा ह्येष पुरुष: शाश्वतोऽव्यय:।
अक्षयश्चाप्रमेयश्च सर्वगश्च निरुच्यते॥ १॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - बेटा! इस महापुरुष को किस प्रकार सनातन, अपरिवर्तनशील, अविनाशी, अपरिमेय और सर्वव्यापी बताया गया है, सुनो॥1॥
 
Brahmaji said – Son! Listen to how this great man is described as eternal, unchangeable, indestructible, immeasurable and omnipresent. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)