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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 350: वैजयन्त पर्वतपर ब्रह्मा और रुद्रका मिलन एवं ब्रह्माजीद्वारा परम पुरुष नारायणकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.350.7 
समासतस्तु यद् व्यास: पुरुषैकत्वमुक्तवान्।
तत् तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि प्रसादादमितौजस:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जिस प्रकार व्यास जी ने संक्षेप में मानव की एकता को समझाया है, उसी प्रकार मैं भी उन अनंत तेजस्वी गुरु की कृपा से तुम्हें समझाऊंगा।
 
But the way Vyasa has briefly explained the unity of the human being, I too will explain the same to you with the grace of that infinitely illustrious Guru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)