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mahabharat 12.350.5: हे राजन्! यह मनुष्य, ऋत और सत्य से संबंधित सूक्त समस्त वेदों में प्रसिद्ध है। महर्षि व्यास ने इसका बहुत ही अच्छी तरह से चिंतन किया है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.350: वैजयन्त पर्वतपर ब्रह्मा और रुद्रका मिलन एवं ब्रह्माजीद्वारा परम पुरुष नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.350.5 
इदं पुरुषसूक्तं हि सर्ववेदेषु पार्थिव।
ऋतं सत्यं च विख्यातमृषिसिंहेन चिन्तितम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्! यह मनुष्य, ऋत और सत्य से संबंधित सूक्त समस्त वेदों में प्रसिद्ध है। महर्षि व्यास ने इसका बहुत ही अच्छी तरह से चिंतन किया है।॥5॥
 
King! This Sukta related to man and Rta and Satya is famous in all the Vedas. Sage Vyasa has pondered over it very well. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)