Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.350.3-4: एक ही मनुष्य अनेक मनुष्यों का उद्गम स्थान कैसे कहा जा सकता है? इसका वर्णन करने के लिए मैं ज्ञानी, तपस्वी, जितेन्द्रिय एवं पूज्य परमर्षि गुरु व्यासजी को प्रणाम करके तुम्हें अधिक पुण्यशाली विश्वात्मा पुरुष का वर्णन करूँगा। 3-4॥ | mahabharat अध्याय 12.350: वैजयन्त पर्वतपर ब्रह्मा और रुद्रका मिलन एवं ब्रह्माजीद्वारा परम पुरुष नारायणकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बहूनां पुरुषाणां च यथैका योनिरुच्यते।
तथा तं पुरुषं विश्वं व्याख्यास्यामि गुणाधिकम्॥ ३॥
नमस्कृत्वा च गुरवे व्यासाय विदितात्मने।
तपोयुक्ताय दान्ताय वन्द्याय परमर्षये॥ ४॥
अनुवाद
एक ही मनुष्य अनेक मनुष्यों का उद्गम स्थान कैसे कहा जा सकता है? इसका वर्णन करने के लिए मैं ज्ञानी, तपस्वी, जितेन्द्रिय एवं पूज्य परमर्षि गुरु व्यासजी को प्रणाम करके तुम्हें अधिक पुण्यशाली विश्वात्मा पुरुष का वर्णन करूँगा। 3-4॥
How can one man be said to be the place of origin of many men? To explain this, after paying obeisance to the enlightened, ascetic, Jitendriya and venerable Paramrishi Guru Vyasji, I will explain to you the more virtuous universal soul man. 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥