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श्लोक  12.350.25 
ब्रह्मोवाच
बहव: पुरुषा: पुत्र त्वया ये समुदाहृता:।
एवमेतदतिक्रान्तं द्रष्टव्यं नैवमित्यपि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले, "पुत्र! तुमने जिन अनेक पुरुषों का उल्लेख किया है, वह ठीक है। मैं जिन्हें उत्पन्न करता हूँ, उनके विषय में क्यों सोचूँगा?"
 
Brahmaji said, "Son! What you have said about the many men you have mentioned is correct. Why would I think about those whom I create?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)