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mahabharat 12.350.15-16: ब्रह्माजी ने कहा- महाबाहो! तुम्हारा स्वागत है। तुम सौभाग्य से मेरे पास आये हो। बेटा! तुम्हारा स्वाध्याय और तप तो सदैव अच्छा चलता रहता है न? तुम सदैव कठोर तप में लगे रहते हो; इसीलिए मैं तुमसे बार-बार तप के विषय में पूछता हूँ॥ 15-16॥   |   mahabharat अध्याय 12.350: वैजयन्त पर्वतपर ब्रह्मा और रुद्रका मिलन एवं ब्रह्माजीद्वारा परम पुरुष नारायणकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.350.15-16 
पितामह उवाच
स्वागतं ते महाबाहो दिष्टॺा प्राप्तोऽसि मेऽन्तिकम्।
कच्चित् ते कुशलं पुत्र स्वाध्यायतपसो: सदा॥ १५॥
नित्यमुग्रतपास्त्वं हि तत: पृच्छामि ते पुन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- महाबाहो! तुम्हारा स्वागत है। तुम सौभाग्य से मेरे पास आये हो। बेटा! तुम्हारा स्वाध्याय और तप तो सदैव अच्छा चलता रहता है न? तुम सदैव कठोर तप में लगे रहते हो; इसीलिए मैं तुमसे बार-बार तप के विषय में पूछता हूँ॥ 15-16॥
 
Brahmaji said- Mahabaho! You are welcome. You have come to me by good fortune. Son! Your self-study and penance are always going on well, aren't they? You are always engaged in rigorous penance; that is why I repeatedly ask you about penance.॥ 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)