Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.350.11-12: एक दिन जब बुद्धिमान चतुर्मुख वाले ब्रह्माजी वहाँ बैठे थे, उसी समय उनके ललाट से उत्पन्न पुत्र, महायोगी, त्रिनेत्रधारी भगवान शिव आकाशमार्ग से विचरण करते हुए सहसा वैजयन्त पर्वत के सामने आ गए और शीघ्र ही आकाश से उस पर्वत के शिखर पर उतर आए॥11-12॥ | mahabharat अध्याय 12.350: वैजयन्त पर्वतपर ब्रह्मा और रुद्रका मिलन एवं ब्रह्माजीद्वारा परम पुरुष नारायणकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ तत्रासतस्तस्य चतुर्वक्त्रस्य धीमत:।
ललाटप्रभव: पुत्र: शिव आगाद् यदृच्छया॥ ११॥
आकाशेन महायोगी पुरा त्रिनयन: प्रभु:।
तत: खान्निपपाताशु धरणीधरमूर्धनि॥ १२॥
अनुवाद
एक दिन जब बुद्धिमान चतुर्मुख वाले ब्रह्माजी वहाँ बैठे थे, उसी समय उनके ललाट से उत्पन्न पुत्र, महायोगी, त्रिनेत्रधारी भगवान शिव आकाशमार्ग से विचरण करते हुए सहसा वैजयन्त पर्वत के सामने आ गए और शीघ्र ही आकाश से उस पर्वत के शिखर पर उतर आए॥11-12॥
One day, when the intelligent four-faced Brahmaji was sitting there, at the same time, the son born from his forehead, the great yogi, the three-eyed Lord Shiva, suddenly came in front of Vaijayanta mountain while roaming through the sky and soon descended from the sky on the peak of that mountain. 11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥