Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.35.9-10h: इसमें कोई संदेह नहीं कि अश्वमेध यज्ञ करने से ब्रह्महत्या का पाप शुद्ध हो जाता है। ऐसे महायज्ञों में जो आभृत स्नान करते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं - ऐसा श्रुतिका* का कथन है।॥9 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.35: पापकर्मके प्रायश्चित्तोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रतुना चाश्वमेधेन पूयते नात्र संशय:।
ये चाप्यवभृथस्नाता: केचिदेवंविधा नरा:॥ ९॥
ते सर्वे धूतपाप्मानो भवन्तीति परा श्रुति:।
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि अश्वमेध यज्ञ करने से ब्रह्महत्या का पाप शुद्ध हो जाता है। ऐसे महायज्ञों में जो आभृत स्नान करते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं - ऐसा श्रुतिका* का कथन है।॥9 1/2॥
There is no doubt that the sin of killing a brahmin is purified by performing the Ashwamedha Yagna. Those who take the Aabhritha bath in such Mahayajnas are freed from all sins - this is the statement of Shrutika*.॥9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥